सरहदों से दूर, दिलों के करीब – सउदिया की ज़मीन पर एक ही दुआ” 🇸🇦

मिट्टी अलग सही, पर अरमान वही हैं,
इंडिया हो या पाकिस्तान, सबके जहान वही हैं।
सउदिया की धूप में पसीना एक सा बहता है,
रोटी की तलाश में हर शख़्स यहां रहता है।
काबा की तरफ़ जब हाथ उठते हैं दुआ में,
न कोई सरहद रहती, न फर्क कोई हवा में।
दिलों में वतन की याद, आंखों में अपनों का नूर,
पर रोज़ी की राह ने कर दिया सबसे दूर।
यहां मिलकर बनते हैं भाईचारे के किस्से,
दर्द भी बांट लेते हैं, खुशियों के भी हिस्से।
इंडिया-पाकिस्तान नाम से नहीं पहचान होती,
सउदिया में मेहनत से ही इंसान की शान होती।
रब से बस इतनी इल्तिज़ा हर शाम होती है,
घर वाले सलामत रहें, यही पैग़ाम होती है।
सरहदें नक्शों में हैं, दिलों में नहीं दीवार,
हम सब एक उम्मत हैं, यही है असली प्यार। 🤲✨
अगर चाहो तो मैं इसे थोड़ा और इमोशनल या थोड़ा ज्यादा प्रोफेशनल अंदाज़ में भी लिख दूं।

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