रेत के शहर में हौसलों की कहानी शायरी

रेत के शहर में भी सपने हरे रखे हैं,
हमने अपने हौसलों को हर सुबह खड़े रखे हैं।
घर से दूर हैं, पर दिल मजबूर नहीं हुआ,
रोज़ी की तलाश में आत्मसम्मान कभी चूर नहीं हुआ।
यहाँ पसीना ही पहचान बन जाता है,
हर मेहनती हाथ अपनी कहानी लिख जाता है।
माँ की दुआ, पिता की उम्मीद साथ चलती है,
इसी भरोसे पर परदेस की हर रात ढलती है।
हम मेहमान नहीं, जिम्मेदार लोग हैं यहाँ,
इसी ज़मीन पर बनता है कल का आसमाँ।
वक़्त लगेगा, पर मुक़ाम ज़रूर आएगा,
सब्र रखने वाला ही इतिहास बनाएगा।                         यहाँ पसीना ही पहचान बन जाता है,
हर मेहनती हाथ अपनी कहानी लिख जाता है।               🌹परदेस में मेहनत, सब्र और आत्मसम्मान की भावना को समर्पित।                        https://otieu.com/4/10583406                                    https://otieu.com/4/10580521

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